एक नए अध्ययन के अनुसार, इन सबसे छिपे हुए खर्चों का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, शर्करा और वसा की अधिकता के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप मोटापा, गैर-संचारणीय रोग और श्रम उत्पादकता में नुकसान होता है।
FAO रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक खाद्य उद्योग में छिपे हुए खर्च पहले की तुलना में काफी अधिक हैं। 154 देशों में गणना किए गए ये खर्च वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 10 प्रतिशत है।
छिपे हुए खर्चों में खराब पोषण के कारण स्वास्थ्य प्रभाव शामिल हैं, जैसे मोटापा और हृदय रोग, जो हर साल लाखों जानें लेते हैं और भारी आर्थिक प्रभाव डालते हैं। खाद्य उद्योग के पर्यावरणीय प्रभाव, जैसे वनों की कटाई, मृदा अपरदन और जलवायु परिवर्तन, भी इन खर्चों में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
यह नुकसान मुख्य रूप से उच्च और उच्च-मध्य आय वाले देशों में अधिक होता है। कुल खर्च का लगभग एक पांचवां हिस्सा पर्यावरण से संबंधित है, जिसमें नाइट्रोजन और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, भूमि उपयोग और जल उपयोग में परिवर्तन शामिल हैं। गरीबी और कुपोषण से संबंधित छिपे हुए खर्च सबसे अधिक निम्न-आय वाले देशों में हैं।
रिपोर्ट वर्तमान खाद्य प्रणाली की तत्काल समीक्षा का आह्वान करती है और जोर देती है कि खाद्य उद्योग का प्रभाव केवल आर्थिक विचारों तक सीमित नहीं है।

