कृषि मंत्री सैम ओज़डेमिर (ग्रीन पार्टी) के पशु कल्याण, नए खाद कानून, कड़ाई से कीटनाशक उपयोग और अन्य पर्यावरण एवं जलवायु कानूनों के प्रस्ताव पहले ही संसद में दायर हो चुके हैं, और आने वाले महीनों में इन्हें 'निपटाया' जा सकता है। फिलहाल इन्हें कुछ महीने के लिए स्थगित किया गया है, लेकिन ये अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
अभी जर्मन राजनीति में अधिकतर असमंजस का माहौल है, और स्थिति दिन-प्रतिदिन बदल सकती है। जैसे पहला सवाल कि चुनाव कब होने चाहिए। हालांकि अब FDP के साथ रिश्ते टूट चुके हैं, लेकिन शोल्ज़ अल्पसंख्यक कैबिनेट के साथ थोड़े समय के लिए शासन कर सकते हैं। वे जनवरी में फैसला लेना चाहते हैं और मार्च में चुनाव करवाना चाहते हैं। CDU (विपक्ष) इस सप्ताह ही स्पष्टता चाहता है।
बุนदेसकांज़लर ने कहा है कि वे जनवरी के मध्य के बाद ही संसद में 'विश्वास प्रस्ताव' पर मतदान करवाना चाहते हैं। शोल्ज़ कहते हैं कि वे पहले कुछ जरूरी मुद्दों को निपटाना चाहते हैं, जैसे आगामी गुरुवार को बजट-2025 की प्रस्तुति (हालांकि यह संभव है या नहीं, अभी अनिश्चित है)।
यह बजट मुख्यतः हाल ही में हटाए गए वित्त मंत्री लिंडनर द्वारा तैयार किया गया था, लेकिन इस पर तीन गठबंधन दलों के बीच सहमति नहीं बनी थी। उम्मीद नहीं की जा सकती कि FDP अब इस बजट के पक्ष में वोट करेगा।
इसके अलावा शोल्ज़ (SPD) और अर्थव्यवस्था मंत्री हाबेक (ग्रीन पार्टी) अपना आर्थिक प्रोत्साहन योजना संसद में प्रस्तुत करना चाहते हैं। अरबों यूरो के निवेश से वे जर्मन अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना चाहते हैं। साथ ही SPD और ग्रीन पार्टी संसद को यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने के फैसले करने देना चाहते हैं।
यदि जनवरी में यह विश्वास प्रस्ताव (जैसा अनुमान है) FDP से समर्थन नहीं पाता, तो बुनदेसकांज़लर शोल्ज़ को 60 दिनों के भीतर नई सरकार प्रस्तुत करनी होगी या नए चुनाव कराने होंगे। सैद्धांतिक रूप में SPD और ग्रीन पार्टी विपक्ष के साथ (सीमित, अस्थायी) गठबंधन कर सकते हैं, जो मूल चुनाव तिथि सितंबर के अंत तक चले। परंतु CDU नेता फ्रेडरिक मर्स ने इसे पहले ही अस्वीकार कर दिया है।
हाल के मत सर्वे से पता चलता है कि वर्तमान में CDU विपक्ष (करीब 30% से अधिक के साथ) सबसे बड़ा दल बन सकता है, लेकिन पूर्वी जर्मनी में दक्षिणपंथी एक्सट्रीम AfD सबसे बड़ा दल के रूप में उभर रहा है। इसके अतिरिक्त सहरा वागेनकनेच्ट की नई BSW गठबंधन वहां तेजी से बढ़ रही है। हाल के क्षेत्रीय चुनावों के बाद तीन पूर्वी जर्मन राज्यों में CDU, BSW और AfD के बीच मध्य-दक्षिणपंथी सरकारें बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

