यह बदलाव कृषि क्षेत्र से लगातार दबाव के बाद आया है। किसान संगठनों और क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन किया और पिछली योजनाओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अपनी आवाज़ उठाई।
कृषि संगठनों की प्रतिक्रिया संतोषजनक रही। वे छूट सीमा बढ़ाने को सही दिशा में एक कदम मानते हैं और इसे कई पारिवारिक व्यवसायों के लिए राहत बताते हैं।
साथ ही वे जोर देते हैं कि यह बदलाव सभी चिंताएँ समाप्त नहीं करता। उनके अनुसार यह अंतिम समाधान नहीं है और विशेष व्यवसायों व परिस्थितियों पर इसके प्रभावों को लेकर सवाल अभी भी मौजूद हैं।
इस बदलाव का मुख्य बिंदु यह है कि कृषि क्षेत्र के लिए वारिस कर की छूट सीमा 1 मिलियन पाउंड से बढ़ाकर 2.5 मिलियन पाउंड कर दी गई है। यह सीमा तय करती है कि वारिस संपत्ति का कौन सा हिस्सा कृषि और व्यवसायिक संपत्ति के नियमों के तहत आता है।
यह बदलाव Agricultural Property Relief और Business Property Relief दोनों पर लागू होगा। इसका अर्थ है कि केवल कृषि भूमि ही नहीं, बल्कि अन्य कृषि व्यवसाय उपकरणों की विरासत भी शामिल है।
अब 2.5 मिलियन पाउंड तक की संपत्ति पूरी तरह से छूट के अंतर्गत आएगी। इसका मतलब है कि इस हिस्से पर वारिस कर नहीं लगेगा। गणनाओं के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत कृषि विरासतें इस नियम के बाहर आ जाएंगी।
सीमा से ऊपर के हिस्से के लिए नियमों में भी बदलाव आया है। अब पूरी छूट लागू नहीं होगी, बल्कि आंशिक छूट दी जाएगी। विवाहित जोड़ों और साझेदारों के लिए यह छूट और बढ़ सकती है क्योंकि यह प्रति व्यक्ति लागू होती है, जिससे वे मिलकर अधिक राशि स्थानांतरित कर सकते हैं।

