पूर्वी जर्मन राज्य ब्रांडेनबर्ग में अब पोलिश सीमा के साथ सूअरों के खिलाफ सुरक्षा बाड़ का अंतिम छेद बंद कर दिया गया है। इसके द्वारा जर्मनी आशा करता है कि अफ्रीकी सुअर महामारी से संक्रमित और अधिक जंगली सूअरों के आगमन को रोका जा सके।
नौ महीने पहले इसके निर्माण की शुरुआत हुई थी। अब 15 किलोमीटर का अंतिम हिस्सा जर्मन क्षेत्र के एक पॉल्डर इलाके में स्थापित किया गया है।
पिछले साल सितंबर में पहली बार AVP (अफ्रीकी वर्ल्ड पिग प्लेग) की खोज के बाद से पोलिश सीमा के साथ और मुख्य प्रभावित इलाकों के आसपास 670 किलोमीटर की स्थायी बाड़ बनाई जा चुकी है। तुलना के लिए कहा जाए तो डेनमार्क में जर्मन सीमा की सुरक्षा के लिए केवल 70 किलोमीटर बाड़ लगानी पड़ी थी।
केवल सूखे मौसम में ही अस्थायी इलेक्ट्रिक बाड़ की जगह एक ठोस, सूअरों के प्रति प्रतिरोधी बाड़ लगाई जा सकी। बाकी बाड़ के हिस्से पहले ही लगाए जा चुके हैं, जो मुख्य रूप से ओडर और नेइस्से नदियों के किनारे बनाए गए हैं। ये दो नदियां जर्मनी-पोलैंड की सीमा का बड़ा हिस्सा बनाती हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध की बचे हुए गोले और पानी से भरी हुई जमीन के कारण बाड़ बनाने का काम बार-बार कठिन और समय लेने वाला रहा। अब आखिरी गैप को बंद कर दिया गया है, जिससे उत्तरी द्वीप उसाडोम से लेकर दक्षिणी जर्मनी के सैक्सन के गोर्लिट्ज़ तक एक बाधा खड़ी हो गई है।
अब तक हम जर्मनों को इस महामारी को मुख्यतः देश के पूर्वी हिस्से में रोकने में सफल रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में पोलैंड में AVP संक्रमित मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।

