लगातार सूखा खेती के क्षेत्र को गंभीर रूप से खतरे में डाल रहा है और EU के शोधकर्ताओं के अनुसार अब तक इसमें पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई है। वर्षा की कमी के कारण कई किसान अपनी फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं और मानव एवं पशु दोनों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता खतरे में आ गई है।
यूरोप के लिए सूखा कोई नया विषय नहीं है। 2021 को छोड़कर यह महाद्वीप 2018 से ही बड़े पैमाने पर सूखे का सामना कर रहा है। जलवैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों ने इसे पहले ही 'बहु-वर्षीय सूखा' कहना शुरू कर दिया है। एक इतालवी अध्ययन से पता चलता है कि पिछले गर्मियों का बड़ा सूखा वास्तव में दिसंबर 2021 में शुरू हुआ था।
ग्राज तकनीकी विश्वविद्यालय इससे भी आगे बढ़ा है। उपग्रह चित्रों के डेटा के आधार पर ऑस्ट्रियाई शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि यूरोप में पिछले पांच वर्षों से भूजल की भारी कमी है।
फ्रांस के दक्षिणी प्रांतों में अब नए वन्य आग लगने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि गर्मी अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन पहले ही कुछ वन्य आग की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं और चिंता है कि अगर बारिश नहीं हुई तो और आग लग सकती हैं।
फ्रांस यूरोप में अकेला ऐसा देश नहीं है जहाँ सूखे का संकट पहले से महसूस किया जा रहा है। स्पेन और इटली में स्थिति लगभग समान है। फरवरी के अंत में कैटलान सरकार ने पानी की खपत को सीमित करने के लिए नियम लागू किए हैं। कृषि को 40% कम पानी उपयोग करना होगा, उद्योग को 15% कम और हर नागरिक को रोजाना 20 लीटर कम पानी इस्तेमाल करने की कोशिश करनी होगी।
सूखे का इटली की कृषि पर भी प्रभाव पड़ा है, जहाँ किसानों को कम पानी की उपलब्धता के कारण फसल कम करनी पड़ रही है। यह इटली के ग्रामीण इलाकों पर लगातार दूसरा साल है जब सूखे की मार पड़ी है।
यूरोप में सूखे को अब एक पर्यावरण और जलवायु समस्या के रूप में ज्यादा स्वीकार किया जा रहा है। पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में नीदरलैंड्स की अध्यक्षता में एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन आयोजित हुआ।
इस सम्मेलन का उद्देश्य जल प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और बढ़ती जल समस्याओं के समाधान तलाशना था। सम्मेलन में 150 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

