पोलैंड को यूरोपीय न्यायालय ने भेदभाव के लिए दोषी ठहराया है। पोलिश सरकार ने ‘मुश्किल न्यायाधीशों’ को निकालने के लिए उन्हें समय से पहले सेवानिवृत्त करने की कोशिश की थी।
एक विवादित पोलिश कानून के अनुसार, महिला न्यायाधीशों और अभियोजकों को 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होना पड़ता है, जबकि पुरुषों को 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति मिलती है। यूरोपीय न्यायालय ने कहा है कि यह कानून समान व्यवहार के कानून के खिलाफ है।
यूरोपीय आयोग ने पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमज़ोर करने के आरोप में पहले भी कार्रवाई शुरू की है। जून में ईयू को लक्जमबर्ग के न्यायालय से पोलैंड के एक अन्य गैरकानूनी कानून के खिलाफ समर्थन मिला था। यूरोपीय आयोग ने इस फैसले को पोलैंड में न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।
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इस बीच 19 नवंबर को यूरोपीय न्यायालय के एक महत्वपूर्ण फैसले का इंतजार है। तब पोलिश सरकार के एक नए कानून पर निर्णय आएगा, जिसके तहत न्यायाधीशों को राजनीतिक रूप से ‘गलत’ फैसले देने पर दंडित किया जा सकता है। यूरोपीय आयोग कहता है कि यह नया कानून पोलिश न्यायराज्य की स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा है।
यूरोपीय न्यायालय में मामले चलने के अलावा पोलैंड के खिलाफ एक अनुच्छेद 7 की प्रक्रिया भी जारी है। अंततः यह प्रक्रिया उस देश की मतदान शक्ति छीन सकती है। इसके लिए सदस्य देशों की सर्वसम्मति आवश्यक है।

