यूरोपीय न्यायालय (एचवीजे) का यह निर्णय तथाकथित "स्वर्ण पासपोर्ट" पर चर्चा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यूरोपीय आयोग की आलोचना और सुरक्षा, कर चोरी तथा भ्रष्टाचार से जुड़े जोखिमों की चिंताओं के बावजूद, माल्टा अपने देश में निवेश करने वाली अमीर गैर-ईयू नागरिकों के लिए अपने कार्यक्रम के साथ बना हुआ है।
माल्टा ने इसकी शुरुआत 2013 में की थी। अब तक इस देश ने इससे 1 अरब यूरो से अधिक प्राप्त किया है। जबकि साइप्रस और बुल्गारिया जैसे अन्य देश, ईयू के दबाव में अपने जटिल कार्यक्रम बंद कर चुके हैं, माल्टा ने इसे जारी रखने के अपने निर्णय में दृढ़ता दिखाई है। इस हालिया फैसले के साथ अन्य देश भी संभवतः इस प्रणाली को फिर से अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
यूरोपीय आयोग ने माल्टा पर मुकदमा किया था क्योंकि ब्रुसेल्स के अनुसार यह प्रणाली ईयू मूल्यों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा, यह भी चिंता जताई गई कि अपराधिक संगठन इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर सकते हैं, जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी के लिए।
पिछले कुछ वर्षों में माल्टा की सरकारी संस्थाएं और नेता बार-बार उस समय विवादों में आए जब अपराधिक लोगों का देश की सरकार पर बढ़ता प्रभाव सामने आया। यह खुलासा हुआ कि प्रधानमंत्री और मंत्री भी रिश्वत लेते थे, जिसके चलते 16 अक्टूबर 2017 को पत्रकार डैफ्ने कारियाना गालिज़िया पर हत्या की कोशिश हुई थी।
अब जब एचवीजे ने पुष्टि की है कि नागरिकता का मूल अधिकार राष्ट्रीय स्तर का है, तो वे देश जो पिछले समय में ईयू के दबाव में अपने कार्यक्रम बंद कर चुके हैं, जैसे कि साइप्रस, संभवतः इस व्यवस्था को पुनः लागू करने पर विचार कर सकते हैं।

