नीदरलैंड और अन्य चार यूरोपीय संघ के देशों ने यूरोपीय कृषि मंत्रियों के लिए एक कार्य दस्तावेज़ में कसाई पशुओं के परिवहन पर प्रतिबंधों की मांग की है। तथाकथित वुघ्ट कार्यसमूह के देश (नीदरलैंड, बेल्जियम, जर्मनी, डेनमार्क और स्वीडन) चाहते हैं कि यूरोपीय संघ में सभी कसाई पशुओं के लिए परिवहन समय अधिकतम 8 घंटे हो।
इससे यूरोपीय संघ के देश यूरोपीय संसद की ANIT समिति की पूर्व की सिफारिशों से जुड़ेंगे, जिसने पहले पशु परिवहन के दौरान होने वाले दुरुपयोगों पर विस्तृत जांच की थी। इन पांच देशों की 'स्थिति पत्र' सोमवार को LNV मंत्रियों द्वारा चर्चा के लिए प्रस्तुत की जाएगी।
कार्य दस्तावेज़ का उद्देश्य 27 यूरोपीय संघ के देशों को एक समान दृष्टिकोण पर लाना है, जिसके बाद यूरोपीय संसद के साथ लगभग बीस साल पुराने पशु परिवहन नियमों के आधुनिकीकरण पर बातचीत की जा सकेगी। यह बताया गया है कि तब से पशु परिवहन की संख्या और उसकी मात्रा दोनों में काफी वृद्धि हुई है।
नोट की मुख्य बात यह है कि यूरोपीय संघ के भीतर और यूरोपीय संघ के बाहर देशों को कसाई पशुओं के दूर-दराज के परिवहन को सीमित करना चाहिए। साथ ही बड़े पिंजरे होने चाहिए, रास्ते में यदि जरूरत हो तो भोजन प्रदान किया जाना चाहिए, और अत्यधिक गर्मी में परिवहन नहीं होना चाहिए। सबसे अच्छा होगा कि जिंदा पशुओं को विदेशों में कसाई के लिए न ले जाया जाए, बल्कि केवल मांस की खेप भेजी जाए।
इसलिए यह तय किया जाना चाहिए कि लोडिंग और अनलोडिंग का समय भी परिवहन समय में शामिल होगा, लोडिंग और अनलोडिंग स्टेशनों पर वीडियो कैमरा निगरानी होनी चाहिए, ट्रकों में GPS नियंत्रण होना चाहिए, और ट्रक ड्राइवरों ने पशु परिवहन के लिए विशेष प्रशिक्षण लिया हो। पांच यूरोपीय संघ के देशों की स्थिति-पत्र में दर्जनों व्यावहारिक मामलों पर सिफारिशें की गई हैं।
हालांकि ये पांच पहलकर्ता सभी यूरोपीय संघ देशों में समान नियमों के लिए कई सुझाव देते हैं, किन्तु पशु परिवहन की निगरानी और कार्यान्वयन में यूरोपीय संघ के देशों के बीच बड़े अंतर के लिए अभी तक कोई समाधान नहीं खोजा गया है।
जहां एक देश में निरीक्षक मामूली अपराधों को नजरअंदाज कर देते हैं, वहीं पड़ोसी देशों में उसके लिए दंडित किया जाता है। इससे खासकर अंतरराष्ट्रीय परिवहन में समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके अलावा, कुछ पुराने नियमों के पाठ कई तरह से व्याख्या के योग्य हैं।
कुछ विषयों पर अभी अंतिम राय देने की सिफारिशें या निर्णय नहीं लिए गए हैं, बल्कि यूरोपीय खाद्य सुरक्षा एजेंसी EFSA के विशेषज्ञों से और सुझाव मांगे गए हैं। इस प्रकार मंत्री फिलहाल यूरोपीय संसद की सिफारिशों और विकल्पों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

