यूरोपीय आयोग ने शुरू में लगभग सभी पशुपालन को नियमों के अंतर्गत लाना चाहा था, जबकि यूरोपीय संसद की कृषि समिति पशुपालन को पूरी तरह बाहर रखना चाहती थी। अब हुए त्रिलोकी समझौते में वार्ताकारों ने पशुपालन के लिए मानकों को काफी बढ़ा दिया है।
यह नियम कृषि व्यवसायों पर लागू होंगे जिनमें 350 बड़े सूअर इकाइयां, 280 पोल्ट्री इकाइयां (300 लेग कुक्कुट के लिए) और 380 मिश्रित इकाइयां हों। व्यापक फार्मिंग और घरेलू उपयोग के लिए छोटे पशुपालन फिलहाल इन नियमों से बाहर रखे गए हैं।
नए नियम धीरे-धीरे लागू होंगे, केवल 2030 से ही प्रभावी होंगे। 2026 तक (नई) यूरोपीय आयोग को यह मूल्यांकन करना होगा कि पशुपालन और कृषि उत्पादन से वायु और भूजल प्रदूषण को कैसे सबसे बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जाए, खासकर मवेशी पालन को ध्यान में रखते हुए।
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नए नियमों के तहत प्रदूषण करने वाली कंपनियों को एक सार्वजनिक रजिस्टर में यह रिकॉर्ड रखना होगा कि वे किन कच्चे माल का उपयोग करते हैं और अपने परिचालन के दौरान कितनी मात्रा में कचरा और प्रदूषण पर्यावरण में छोड़ते हैं। इसके खिलाफ स्थानीय निवासियों द्वारा नुकसान और शिकायत दर्ज की जा सकती है। यह सब प्रत्येक ईयू देश को अपने कानूनों में शामिल करना होगा। साथ ही, कई सदस्य देशों में जुर्माने की राशि को भी काफी बढ़ाना होगा।
ब्रसेल्स के राजनेताओं ने पिछले वर्षों में समय-समय पर कृषि के प्रदूषण को नियंत्रित करने का प्रयास किया है। ग्रीन डील की पर्यावरण और जलवायु कानूनों तथा नए कृषि नीति के साथ अपेक्षित शुरुआत हुई है, लेकिन हाल के समय में इस हरित नीति पर दबाव बढ़ा है।
कृषि क्षेत्र ईयू में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन जैसे-जैसे अन्य उद्योग तेजी से ‘स्वच्छ’ बन रहे हैं, यह सबसे बड़ा प्रदूषक बन सकता है।
यूरोपियन पर्यावरण एजेंसी के अनुसार, 2005 से 2021 के बीच कृषि से उत्सर्जन केवल 3 प्रतिशत घटा है। इसे परिवहन क्षेत्र में 7.6 प्रतिशत की कमी और आवास तथा भवनों से उत्सर्जन में 31 प्रतिशत कमी से तुलना किया जा सकता है।

