‘विजन 2050’ के तहत डेनिश पशुपालन ने स्वयं को लक्ष्य बनाया है कि आने वाले वर्षों में बिना कटे पूंछ वाले सूअरों की संख्या दोगुनी की जाए। L&F के अनुसार, इसलिए मौजूदा स्पष्ट प्रतिबंध को और सख्त करने की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि इस प्रतिबंध के बावजूद 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में अभी भी सुँडुक की पूँछें काटी जाती हैं। इस क्षेत्र ने अब एक पुनर्वितरण कार्यक्रम पेश किया है, जिसमें सभी उत्पादक एक छोटी फीस देते हैं, जिसे उन किसानों के बीच बांटा जाता है जो सूअरों की पूंछें पूरी रखे हुए हैं। 2050 तक डेनिश सूअर आबादी की पूंछें घुंघराली होनी चाहिए।
डेनिश प्रधानमंत्री मेत्ते फ्रेडरिकसन इस बात से नाराज हैं कि डेनिश सूअर कंपनियां अपने कई सूअरों को विदेशों में काटने के लिए भेजती हैं जिससे देश के खुद के कटाई घरों की उपेक्षा होती है। हाल ही में डेनमार्क में दो बड़े कटाई घर बंद हो चुके हैं, जिनमें लगभग 2000 नौकरियां चली गईं।
प्रधानमंत्री फ्रेडरिकसन ने कहा कि कृषि क्षेत्र स्वयं यह सुनिश्चित कर सकता है कि डेनिश सूअर डेनमार्क में ही कटे, न कि विदेशों में। यह टिप्पणी उन्होंने तभी की जब डेनिश विपक्ष ने उनसे पूछा था कि क्या वे गारंटी दे सकती हैं कि भविष्य में कृषि पर लगने वाला CO2 कर नौकरियां नहीं छीन पाएगा।
फ्रेडरिकसन ने यह भी कहा कि डेनिश रोजगार पर सिर्फ CO2 कर ही खतरा नहीं है, बल्कि आगामी 'डेनिश पशु संरक्षण कानून' और यूरोपीय संघ के कड़े पशु परिवहन नियम भी चुनौती हैं।
उन्होंने कहा, 'लंबे परिवहन वाले सूअरों के लिए यह बहुत दुखद है, और जो परिवार हाल ही में बंद हुए डेनिश कटाई घरों में नौकरी खो बैठे हैं उनके लिए भी अफसोस है। इसलिए अगर हम कृषि की ओर एक ऐसा संवाद कर सकें जिसमें डेनमार्क में नौकरियों को बनाए रखा जा सके, तो यह सकारात्मक होगा।'

