डेनिश सरकार ने यह निर्णय विशेषकर यूरोपीय आयोग के साथ गहन बातचीत के बाद लिया है। डेनमार्क पिछले दस से पंद्रह वर्षों से, जैसे कि नीदरलैंड और आयरलैंड, समुद्री (तटीय) जल प्रदूषण को पर्याप्त रूप से कम करने में सफल नहीं हो पाया है।
पहले जर्मनी ने कई वर्षों तक यूरोपीय नियमों से बचने की कोशिश की और इसके कारण 2014 में ही डेरोगेशन खो दिया। कुछ डेनिश कृषि व्यवसायों को पहले से ही 22 वर्षों तक नाइट्रेट डिरेक्टिव की छूट मिली हुई है, लेकिन अब वे घास के मैदान पर कम पशु गोबर फैला पाएंगे। इसलिए निकट भविष्य में एक मिलियन टन पशु गोबर के लिए दूसरी जगह ढूंढनी होगी।
डेरोगेशन खोने का बड़ा प्रभाव डेयरी क्षेत्र पर पड़ेगा, क्योंकि डेनिश दूध देने वाली गायों का लगभग 40 प्रतिशत ऐसे फार्मों पर है जो इसका उपयोग करते हैं। पशुपालकों को अपने पशु गोबर को कहीं और निपटाने के लिए लगभग 35 प्रतिशत अधिक क्षेत्र खोजने होंगे, जिसका अनुमानित क्षेत्रफल 30,000 हेक्टेयर है। आयरलैंड में भी इसी तरह की स्थिति धमकी देती है।
पिछले वर्षों में लगातार नीदरलैंड के कृषि मंत्री आगे विस्तार के लिए अनुमति पाने का प्रयास करते रहे, लेकिन ब्रुसेल्स के साथ इस पर चर्चा संभव नहीं हो सकी, क्योंकि पहले से ही कुछ वर्षों में चरणबद्ध कमी निर्धारित है।
पशुपालकों की संख्या कम करने की संभावित योजना भी डेनमार्क में कुछ महीनों से मुख्य मुद्दों में है, विशेषकर तब जब विशेषज्ञ समिति ('ग्रीन ट्रिपारटाइट') ने नाइट्रोजन उत्सर्जन पर अतिरिक्त कर लगाने की सलाह दी है। ऐसे में पशुपालक टिकाऊ और जलवायु-तटस्थ खाद्य उत्पादन में बदलाव के लिए सब्सिडी पा सकते हैं।

