लेखा परीक्षक कार्यालय ने 2014 से 2019 तक सब्सिडी भुगतानों की जांच की, एक ऐसी अवधि जिसमें कोपेनहेगन ने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण को भी बढ़ावा दिया। इस अवधि में लगातार कई मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के फंडों के दुरुपयोग को दबा दिया, निष्कर्ष निकाला गया।
सब्सिडी आवेदनों पर प्रति आवेदन अधिकतम राशि तय थी। चूंकि कृषि कंपनियां, कसाईघर और सूअर पालन करने वाले अपनी आवेदनों को अलग-अलग स्थानों में विभाजित करते थे, इसलिए वे इन अधिकतम सीमाओं को पार कर सकते थे।
यह मई में राष्ट्रीय लेखा परीक्षक की रिपोर्ट में सामने आया, जिसमें डेनिश कृषि एजेंसी को दी गई यूरोपीय संघ सहायता के भुगतान पर कड़ी आलोचना की गई।
राष्ट्रीय लेखा परीक्षक कार्यालय ने निष्कर्ष निकाला कि डेनिश कृषि एजेंसी वर्षों से यह जांचने में विफल रही है कि किन खेती स्थलों के मालिक सब्सिडी पा रहे हैं।
इस तरीके से किसानों ने अपने व्यवसाय को दो, तीन या कम से कम चार अलग-अलग वैट नंबरों में विभाजित कर लिया ताकि वे चार गुना सब्सिडी पा सकें।
डेनमार्क के उदार सब्सिडी और सहायता नियम पिछले वर्षों में पहले भी आलोचना और टिप्पणी का विषय रहे हैं, जिससे कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की निकासी और एक मंत्री के इस्तीफे तक का मामला बना।
लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के कारण अब वर्तमान डेनिश सरकार को भी इसके परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रुसेल्स डेनमार्क से गलत तरीके से दी गई यूरोपीय सब्सिडी वापस ले सकता है।

