म्यूनिख की एक अदालत ने बवेरिया के पर्यावरण मंत्रालय की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया है जो 31 गर्भवती वर्शेन के हंगरी के रास्ते कज़ाकिस्तान तक के पशु परिवहन के खिलाफ थीं।
इस निर्णय के साथ ही अदालत ने आधिकारिक पशु चिकित्सक को इस परिवहन को जारी रखने का आदेश दिया है। साथ ही परिवहनकर्ता का निर्यात अनुमतिपत्र भी मंजूर हो चुका है।
कज़ाकिस्तान उन 18 'तीसरे देशों' की सूची में है, जिनके संबंध में दक्षिण जर्मनी के बवेरिया के पर्यावरण मंत्रालय को संदेह है कि वहां निर्यात के समय पशु कल्याण मानदंडों का पालन होगा या नहीं।
हंगरी में परिवहन के दौरान 30 दिनों की क्वारंटाइन के आरक्षित होने का मतलब है कि यह परिवहन दो अलग-अलग प्रक्रियाओं में बांटा गया है, ऐसा अदालत के अनुसार है। वर्तमान कानूनी स्थिति के मुताबिक हंगरी के अधिकारियों के पास आगे के निर्यात पर निर्णय लेने का अधिकार है, ऐसा अदालत का मत है।
अक्टूबर में, बवेरिया के पर्यावरण मंत्रालय ने एक नया आदेश जारी किया जिसके तहत अन्य यूरोपीय संघ देशों को भी निर्यात से रोक लगाई जा सकती है यदि वहां से पशुओं को 'तीसरे देशों' (अर्थात गैर-ईयू देशों) को भेजा जाए। यही कारण था कि हंगरी को निर्यात प्रमाणपत्र देने से इंकार किया गया था।
18 तीसरे देशों की इस नकारात्मक सूची को जर्मन पशु निर्यातक देश के संघीय एवं यूरोपीय संघ के कानूनों के साथ असंगत मानते हैं। बवेरिया के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लगाई गई अतिरिक्त बाधाएँ न केवल पशु कल्याण में कोई सुधार नहीं करतीं बल्कि स्थानीय व्यवसायों को आर्थिक नुकसान भी पहुंचाती हैं, ऐसा परिवहन क्षेत्र का कहना है।
कृषि क्षेत्र के एक प्रवक्ता ने भी जोर देकर कहा कि प्रजनन पशुओं की बिक्री छोटे पैमाने की खेती और बवेरिया के आल्प्स क्षेत्र की खेती के स्थायित्व में महत्वपूर्ण योगदान देती है। पड़ोसी देशों जैसेऑस्ट्रिया अपने पशुओं को बिना किसी अड़चन के 'तीसरे देशों' को निर्यात कर सकते हैं।

