यूरोपीय आयोग इसलिए सदस्य राज्यों से ऊर्जा बाजार के दीर्घकालिक व्यवधानों के लिए तैयार होने का आह्वान करता है। अमेरिका/इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध ईंधन की कीमतों में वृद्धि और उपलब्धता पर दबाव बढ़ा रहा है।
यह चेतावनी ऊर्जा आयुक्त डैन जोर्गेंसन द्वारा ऊर्जा मंत्रियों को लिखे एक पत्र में आई है। यह पत्र पिछले सप्ताहांत में भेजा गया था, जो यूरोप में संघर्ष के प्रभाव पर आपात बैठक (सोमवार दोपहर) से पहले था।
कम इस्तेमाल करें
ब्रसेल्स के अनुसार, ईयू देशों को निरंतर व्यवधान के लिए तैयार रहना चाहिए। संकट की अवधि को लेकर अनिश्चितता के कारण व्यापक योजना बनाना आवश्यक है।
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सरकारों से तेल और गैस के उपयोग को कम करने पर विचार करने को कहा गया है। इसमें खासतौर पर परिवहन क्षेत्र पर जोर दिया गया है, जहां बहुत ईंधन इस्तेमाल होता है।
इसका तात्पर्य वास्तविक रूप में यह हो सकता है कि ईयू नागरिकों को कम ड्राइव या उड़ान भरनी पड़े। आयोग यह बताता है कि सबसे बड़ा कमजोर पक्ष कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस में नहीं है, बल्कि डीजल और विमान ईंधन जैसे उत्पादों में है, जिनके लिए यूरोप काफी हद तक आयात पर निर्भर है।
निर्भरता
यह निर्भरता यूरोपीय बाजार को व्यवधानों के प्रति संवेदनशील बनाती है। कमी और उच्च लागत अर्थव्यवस्था में छिपती हैं और व्यवसायों एवं घरों पर दबाव डालती हैं।
साथ ही ज़ोर दिया गया कि ईयू देशों को ऐसे उपाय नहीं करने चाहिए जो ईंधन की खपत बढ़ाएं या तेल उत्पादों के व्यापार में बाधा डालें। यूरोपीय रिफाइनरियों में उत्पादन भी धीमा नहीं होना चाहिए।
इसलिए देशों को सलाह दी गई है कि वे रिफाइनरियों की गैर-आवश्यक रखरखाव को टालें। इससे उत्पादन स्तर बनाए रखा जा सकता है और कमियों को यथासंभव सीमित किया जा सकता है।

