यह कि EU के देशों ने 2020 में उत्सर्जन में कमी का मानक पूरा किया, वह EU देशों द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से नहीं था, बल्कि आर्थिक मंदी और कोरोना संकट के कारण ऊर्जा उपयोग में कमी के कारण था।
तीन देशों, जिनमें नीदरलैंड और जर्मनी शामिल हैं, ने लेखा प्रत्येकक्षा के अनुसार अपनी अनिवार्य कटौतियाँ केवल अन्य देशों से बचत खरीदकर पूरी की। इसके अलावा छह सदस्य देशों ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा नहीं किया और इसे भी अन्य राज्यों से खरीदारी करके संतुलित किया।
लेखा प्रत्येकक्षा ने एक नए अध्ययन में कहा कि EU को केवल राष्ट्रीय उद्योग और कृषि के उत्सर्जनों को ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई और समुद्री यातायात और व्यापारिक गतिविधियों के कारण होने वाली ग्रीनहाउस गैसों को भी शामिल करना चाहिए।
औद्योगिक उत्सर्जन के लिए नई व्यवस्था (RIE) के साथ इसका प्रारंभ हुआ है जहाँ अब पशुपालन के बड़े हिस्से को भी शामिल किया गया है। लेकिन यहाँ भी इसको लागू करने की जिम्मेदारी आंशिक रूप से देशों पर ही छोड़ दी गई है।
आगामी वर्षों में यह बहस नयी EU क़ानूनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जैसे कृषि में कीटनाशकों के उपयोग और प्रकृति पुनर्स्थापना (यदि वह लागू होता है) के खिलाफ नीतियाँ।
हमें EU देशों में उत्सर्जन के परिणामों पर अधिक समझ की जरूरत है ताकि EU नीति के पूर्ण परिणाम स्थापित किए जा सकें, ऐसा कहा जोएल एल्विंगर ने, जो लक्जमबर्ग के ERK सदस्य हैं और जिन्होंने इस नियंत्रण का नेतृत्व किया। उन्होंने "अंधेरे क्षेत्र" की ओर भी इशारा किया, जिनमें से कुछ लक्ष्य वैधानिक नहीं बल्कि संकेतात्मक हैं।

