यह शोध उन्हीं यूरोपीय सब्सिडियों पर केंद्रित है जो संसदीय गतिविधियों के लिए प्रदान की जाती हैं, जैसे गुट की बैठकों, स्टाफ खर्चों और नागरिकों के साथ संचार के लिए। इसके बजाय कई मामलों में धन का एक हिस्सा राष्ट्रीय राजनीतिक सहयोगियों और वैचारिक समान संगठनों को सीधे या अप्रत्यक्ष समर्थन के लिए इस्तेमाल किया गया। यह झूठे संस्थानों और फाउंडेशन के माध्यम से किया गया।
फ्रांस में सब्सिडी का पैसा उन दलों और राजनेताओं तक पहुंचाया गया जो रासंबलमेंट नेशनल के वैचारिक साथियों से जुड़े हैं। ये भुगतान उन संगठनों के माध्यम से हुए जो दिखने में उस पार्टी से स्वतंत्र थे, लेकिन असल में बेहद निकट सम्बन्धित पाए गए। फ्रांसीसी न्यायपालिका इस तरह के मामलों की जांच कर रही है, लेकिन नए अध्ययन से पता चलता है कि अन्य देशों में भी इसी तरह के दुरुपयोग हुए।
जर्मनी में आधिकारिक रूप से अफडी के युवा संगठन के लिए निर्धारित यूरोपीय संघ का धन संसद के बाहर राजनीतिक सहयोगियों की गतिविधियों को वित्तपोषित करने में इस्तेमाल किया गया। ऑस्ट्रिया में एफपीओ से जुड़ी एक फाउंडेशन को “नागरिक परियोजनाओं” के लिए सब्सिडी दी गई, जो असल में समान विचारधारा वाले आंदोलनों के अभियान का समर्थन करने हेतु थी। ये धन प्रवाह राष्ट्रीय संगठनों की शासन व्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ की सब्सिडी डोज़ियर की पारस्परिक जांच से उजागर हुए।
इन इस्तेमाल की गई व्यवस्थाएं कई मामलों में कानूनी दृष्टि से संदिग्ध थीं, परन्तु अक्सर यूरोपीय संसद की प्रशासनिक प्रणाली द्वारा नहीं पकड़ी गईं। नियंत्रण प्रणाली पर्याप्त नहीं थी क्योंकि गुट स्वयं अपने खर्चों के लिए जिम्मेदार थे। इस कारण वर्षो तक बिना सटीक उद्देश्य के जांच के धन आवंटित होता रहा।
ध्यान देने योग्य है कि जिन पार्टियों ने यह धन प्रवाह संचालित किया, उन्होंने इस वर्ष पहले पर्यावरण संगठनों के लिए यूरोपीय संघ की सब्सिडियों पर कठोर आलोचना की थी। उन्होंने पर्यावरण समूहों पर यूरोपीय कृषि नीति के खिलाफ राजनीतिक अभियानों के लिए सब्सिडी उपयोग करने का आरोप लगाया था। उस समय यह आरोप कड़े निगरानी के कारण बना, जबकि अपने ही गुटों में हुए दुरुपयोग की जांच लगभग नहीं हुई।
नए यूरोपीय मीडिया शोध ने यूरोपीय संसद में सब्सिडी प्रबंधन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वर्ष बाद में संसदीय गुटों के वार्षिक लेखा-जोखा को फिर से मंजूरी देनी है। हाल के खुलासे लेखा मंजूरी प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव डालने और खर्चों के नियंत्रण के लिए संभवतः कड़े नियम लाने की उम्मीद जगाते हैं।
अभी तक स्पष्ट नहीं है कि यूरोपीय संसद संबंधित पार्टियों या गुटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी या नहीं। अभी तक कोई प्रतिबंध भी लगाए नहीं गए हैं। फिर भी राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है कि यूरोपीय संघ के धन के दुरुपयोग का सख्ती से मुकाबला किया जाए। शोधकर्ता इस बात का संकेत दे रहे हैं कि वे अतिरिक्त सामग्री के साथ आगे के खुलासे कर सकते हैं।

