यूरोपीय आयोग चाहता है कि यूरोपीय संघ के देश अपनी राष्ट्रीय सकल आय से योगदान 1.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.26 प्रतिशत करें। इससे लगभग 1.8 ट्रिलियन यूरो के बजट का वित्तपोषण होना है। प्रस्ताव के अनुसार, नए यूरोपीय कर भी लगाए जाएंगे, खासकर बड़े व्यवसायों पर केंद्रित। इन करों से प्राप्त आय का कुछ हिस्सा राष्ट्रीय योगदानों की पूरक होगी।
अतिरिक्त धन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रक्षा और सुरक्षा के लिए निर्धारित है। आयोग ने रूसी भू-राजनीतिक खतरे में वृद्धि की ओर इशारा किया है और चाहता है कि यूरोपीय संघ सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। पहली बार बजट में संरचनात्मक रक्षा व्यय शामिल हैं, जैसे सैन्य उपकरणों की संयुक्त खरीद और हथियार उद्योग को समर्थन।
इसके अलावा आर्थिक नवाचार और रणनीतिक निवेशों के लिए अतिरिक्त धन उपलब्ध होगा। सरल वित्तपोषण लाइनों के माध्यम से आयोग औद्योगिक चुनौतियों पर तेज़ी से प्रतिक्रिया करना चाहता है। मौजूदा यूरोपीय संघ कोषों को बड़े 'राष्ट्रीय लिफाफों' में मिलाया जाएगा, जिससे सदस्य देशों को यह स्वतंत्रता मिलेगी कि वे धन का उपयोग कहां करें। आलोचक कहते हैं कि इस तरह की पुन:राष्ट्रीयकरण से साझा यूरोपीय नीति कमजोर हो सकती है।
इन विस्तारों के मुकाबले, कृषि बजट में भारी कटौती हो रही है। यूरोपीय आयोग बड़े कृषि उद्यमों के लिए सब्सिडी में अरबों यूरो की कटौती का प्रस्ताव रखता है। इससे कृषि का हिस्सेदारी कुल यूरोपीय संघ के खर्च में अब तक की सबसे कम हो जाएगी। हालांकि, छोटे कृषि व्यवसायों और युवा किसानों के लिए आय सहायता के रूप में काफी 'किसान धन' उपलब्ध रहेगा।
किसान संगठन कटौती पर गुस्से में हैं। कई देशों में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है। वे प्रस्ताव को अपनी आय के लिए सीधा खतरा मानते हैं और स्थिरता एवं खाद्य उत्पादन की बढ़ती लागत की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। एक स्रोत के अनुसार फ्रांस में राष्ट्रीय प्रदर्शनों पर वार्ताएं चल रही हैं।
यूरोपीय संसद में भी विरोध बढ़ रहा है। कई राजनीतिक समूहों ने कहा है कि वे इस रूप में प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे। वे रणनीतिक प्राथमिकताओं और पारंपरिक यूरोपीय मुख्य क्षेत्रों के बीच संतुलन की कमी की आलोचना कर रहे हैं। विशेष रूप से कृषि और क्षेत्रीय कोषों के पुनर्वितरण के तरीके को दक्षिणी और पूर्वी यूरोपीय संघ देशों में विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
आगामी महीनों में यूरोपीय संघ के सदस्य देश आपस में इस प्रस्ताव पर बातचीत करेंगे। साथ ही यूरोपीय संसद में विभिन्न समूहों के बीच भी वार्ताएं होंगी। दोनों पक्षों के समझौते के बाद ही बहुवर्षीय बजट को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। यह प्रक्रिया महीनों तक चलने की संभावना है और इसमें संशोधन निश्चित होंगे।

