यूरोपीय संसद का मानना है कि चेक प्रधानमंत्री आंद्रेई बाबिश को अपनी यूरोपीय सब्सिडी वापस करनी चाहिए। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने स्वयं के कृषि-रासायनिक व्यवसाय एग्रोफर्ट को यूरोपीय सब्सिडी प्रदान करने में सीधे प्रभाव डाला है।
नीदरलैंड की यूरोपीय संसद सदस्य लारा वोल्टर्स (पीवीडीए) ने इस संबंध में एक रिपोर्ट सह-तैयार की है, जिसे बजट नियंत्रण समिति ने कल लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार किया। यूरोपीय सरकारी प्रमुख और राष्ट्राध्यक्ष अब तक अपने सहयोगी बाबिश के बारे में बयान देने से इनकार कर रहे हैं।
यूरोपीय संसद का मानना है कि प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए, लेकिन यूरोपीय आयोग के तरह चेक की यूरोपीय संघ की सब्सिडी हटा कर नहीं। ऐसा होने पर चेक जनता को नुकसान होगा। यूरोपीय संसद का कहना है कि भविष्य में बाबिश के व्यवसायों को कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
व्यवसायी बाबिश 2017 से प्रधानमंत्री हैं। वे एग्रोफर्ट नामक एक बड़े समूह के भी मालिक हैं, जो कृषि रासायनिक उत्पादों के व्यापार में है। उन्होंने अपनी नियंत्रण formally दो होल्डिंग कंपनियों में रखा है, लेकिन उनके ऊपर पूरा अधिकार उन्हीं का है।
यूरोपीय संसद चेक रिपब्लिक में स्थिति को लेकर लंबे समय से चिंतित है, जहां बाबिश के कार्यकाल में सरकारी और व्यवसायिक हितों का टकराव पैदा हुआ है। 2018, 2019 और 2020 में यूरोपीय संसद ने ऐसे प्रस्ताव पारित किए, जिनमें चेक में यूरोपीय कृषि कोष के दुरुपयोग की ओर ध्यान दिलाया गया।
यह मुद्दा इस बात में भी योगदान देता है कि नए GLB कृषि नीति में बड़ी कृषि कंपनियों को भुगतान की सीमाएं निर्धारित की जा सकें, और GLB फंड को कई प्राप्तकर्ताओं में बाँटा जाए।
कुछ यूरोपीय संसद सदस्य मानते हैं कि बाबिश का मामला यूरोपीय संघ के देशों में जांच बढ़ाने के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, और कहते हैं कि प्रत्येक देश को बेहतर समीक्षा करनी चाहिए। वहीं, अन्य का कहना है कि व्यवहारिक तथ्य इसके उल्टा दिखाते हैं।

