यूरोपीय संसद यूरोपीय बहुवर्षीय बजट (2021-2027) पर बातचीत में अपनी मजबूती बनाए हुए है। यूरोपियन संसद की बजट समिति 1800 अरब यूरो (जिसमें कोरोना पुनर्प्राप्ति कोष भी शामिल है) से 39 अरब यूरो अधिक राशि चाहती है, जिसे जून में सरकार के प्रमुखों ने मंजूर किया था।
ईयू सूत्रों के अनुसार, कुछ अरबों की बात पर सम्भवतः चर्चा हो सकती है, लेकिन उससे अधिक पर नहीं। जर्मन चांसलर अंगेला मर्केल का कहना है कि जल्दी परिणाम आना चाहिए। अगर यूरोपीय संसद और सरकार प्रमुख इस महीने के अंत तक सहमति नहीं बनाते हैं, तो पुनर्प्राप्ति कोष का धन जल्दी इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। मर्केल ने जुलाई में ही कहा था कि संसद के साथ बातचीत कठिन होगी।
संसद स्वास्थ्य, विज्ञान, जलवायु और युवाओं के लिए अधिक धन की मांग करती है। साथ ही यह सख्त गारंटी चाहती है कि ऐसे देशों (जैसे हंगरी और पोलैंड) को कोई ईयू सब्सिडी न मिले जो कानून की सुरक्षात्मक व्यवस्था का पालन नहीं करते। अब तक सरकार के प्रमुख जुर्माने की धमकी देते रहे हैं, मगर वे पूरी तरह लागू नहीं करते। यूरोपीय संसद का मानना है कि पांच वर्षों की व्यर्थ वार्ता के बाद अब निर्णायक कदम उठाए जाने चाहिए।
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ईयू मंत्री परिषद और संसद के बीच वोटिंग का माहौल बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। अगर यह महीने के अंत तक सहमति नहीं बनती है, तो जनवरी से नए बजट को लागू करना खतरे में आ जाएगा। यह 750 अरब यूरो के कोरोना कोष के लिए भी लागू होता है, जिसे खास तौर पर सबसे ज्यादा प्रभावित देशों और क्षेत्रों के लिए जल्दी उपयोगी बनाना था।
पोलैंड के उपप्रधानमंत्री यारोस्लाव काज़िंस्की कहते हैं कि अगर ईयू ब्लॉक देश पर 'ब्लैकमेलिंग' करता रहा और अपनी वैल्यूज़ थोपता रहा, तो उनका देश बहुवर्षीय बजट और कोरोना पुनर्प्राप्ति योजना पर वीटो करेगा।
लेकिन अभी ऐसा स्थिति दूर है: सबसे पहले इस सप्ताह ईयू संसद और सदस्य देशों को सहमति बनानी होगी। कानून की सुरक्षा के अलावा नियमित बजट के लिए अतिरिक्त धन भी संसद की हार्दिक मांग है। यह विज्ञान और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रम इरास्मस जैसे क्षेत्रों के लिए 39 अरब यूरो अधिक चाहती है।

