इंडोनेशिया के साथ समझौता हस्ताक्षर के लिए तैयार है। इसके तहत कई व्यापार बाधाएं समाप्त हो जाएंगी, जिससे इंडोनेशियाई उत्पादों को यूरोप में आसानी से निर्यात किया जा सकेगा। इसके साथ ही यूरोपीय कंपनियों को अधिक सुनिश्चितता और एक बड़े विकासशील बाजार तक पहुंच मिलेगी।
भारत के साथ बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। दोनों पक्ष अभी अंतिम विवरणों को तय करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस साल के अंत तक एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकें। यह केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश, विमानन, नवाचार और प्रौद्योगिकी व स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को भी शामिल करता है।
फिर भी, कुछ जटिल मुद्दे बने हुए हैं। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिक वाहन और कृषि उत्पाद बातचीत में संवेदनशील हैं। दोनों पक्ष अपने उत्पादकों की सुरक्षा करते हुए निर्यात और सहयोग के नए अवसर प्रदान करने वाले समझौते करने के इच्छुक हैं।
भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती भूमिका निभा रहा है। यह देश सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यूरोप के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार साझेदार है। इसलिए, एक समझौता दोनों पक्षों के लिए बड़े लाभकारी हो सकता है, जिसमें अधिक व्यापार, नए रोजगार और निवेश शामिल हैं।
साथ ही, यूरोपीय संघ भारत की विश्व राजनीति में भूमिका की आलोचनात्मक समीक्षा करता है। दिल्ली के मॉस्को के साथ घनिष्ठ संबंध और चीन के साथ सहयोग ब्रुसेल्स में चिंताएं पैदा करते हैं। प्रधानमंत्री हाल ही में चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया के नए विरोधी-पश्चिमी गठबंधन की एक शीर्ष सम्मेलन में शामिल हुए थे।
EU के लिए अभी अधिक व्यापार समझौते करना महत्वपूर्ण है। हाल ही में चार दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ मर्कोसुर व्यापार समझौते पर अंतिम निर्णय लिया गया। एशिया और अफ्रीका के देशों के साथ सहयोग कर यूरोप संयुक्त राज्य अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करना और कच्चे माल तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं में अधिक सुनिश्चितता प्राप्त करना चाहता है।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अपने बाजारों की सुरक्षा और भी सख्त कर रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

