32 नाटो देशों के नेताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य एकता बनाए रखना है। अंकारा में होने वाली यह बैठक यह संकेत देनी चाहिए कि विभिन्न मतों के बावजूद गठबंधन रूस से जुड़ी सुरक्षा खतरों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाकर यूरोप की सुरक्षा सुनिश्चित करता रहेगा।
इसमें नाटो महासचिव मार्क रुट्टे की केंद्रीय भूमिका है। वे (दो साल पहले हेग में नाटो शिखर सम्मेलन की तरह) संयुक्त राज्य अमेरिका को गठबंधन के करीब रखने का प्रयास कर रहे हैं और चाहते हैं कि मतभेद संयुक्त संदेश पर हावी न हों।
ट्रम्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का रवैया महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नाटो, रक्षा खर्च और यूरोपीय सहयोगियों की जिम्मेदारियों को लेकर उनकी दृष्टिकोण से गठबंधन के संबंधों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
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साथ ही, नाटो में यह विश्वास बढ़ रहा है कि यूरोप को अपनी खुद की रक्षा की जिम्मेदारियां अधिक लेनी चाहिए। इसलिए रक्षा व्यय में और वृद्धि तथा सैन्य उत्पादन क्षमता के विस्तार को अगली बैठक के एजेंडे में शीर्ष प्राथमिकता दी गई है।
अधिक हथियार
रक्षा उद्योग के सुदृढ़ीकरण पर भी काफी ध्यान दिया जा रहा है। सदस्य देश मिलिट्री उपकरण के उत्पादन को बढ़ाना चाहते हैं ताकि बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सके और सामूहिक शक्ति बढ़े।
यूक्रेन को समर्थन भी मुख्य विषयों में से एक बना हुआ है। यूरोपीय नाटो सदस्य देश और कनाडा दीर्घकालिक सैन्य और सुरक्षा समर्थन देना जारी रखना चाहते हैं। इसके अंतर्गत आगामी वर्षों के लिए 70 अरब यूरो के समर्थन पैकेज पर चर्चा हो रही है।
रूसी खतरा
हालांकि यूरोपीय देश वित्तीय जिम्मेदारी का एक बड़ा हिस्सा उठा रहे हैं, नाटो यह रेखांकित करता है कि यूक्रेन की रक्षा में संयुक्त राज्य अमेरिका सैन्य रूप से अनिवार्य बना हुआ है। साथ ही, यूरोपीय सदस्य देश ऐसे भविष्य की तैयारी कर रहे हैं जहां वे अपने महाद्वीप की रक्षा में बड़ा रोल निभाएंगे।
नाटो रूस पर दबाव बनाए रखना चाहता है। सदस्य देश रूस को यूरो-अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लंबी अवधि का खतरा समझते हैं। इसलिए अंकारा का सम्मेलन नई प्रतिबद्धताओं से जुड़ा एक मंच ही नहीं, बल्कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के दौर में गठबंधन की राजनीतिक स्थिरता की परीक्षा भी है।

