यूरोपीय हवाईअड्डों को यह स्वतन्त्रता दी जाएगी कि वे तय करें कि वे नई उपकरण कब और कैसे इस्तेमाल करेंगे।
2006 से यूरोप में नियम है कि हैंडबैग में तरल पदार्थ की प्रत्येक पैकिंग 100 मिलीलीटर से अधिक नहीं हो सकती। यात्रियों को अपनी बोतलें एक पारदर्शी कृत्रिम थैली में डालनी होती हैं। यह नियम तब लागू किया गया था जब एक असफल साजिश हुई थी जिसमें विमान में आतंकवादी हमले के लिए तरल विस्फोटक इस्तेमाल किए जाने थे।
यह सीमा केवल पानी या सॉफ्ट ड्रिंक तक सीमित नहीं है, बल्कि क्रीम, टूथपेस्ट, जेल, परफ्यूम और स्प्रे कैन पर भी लागू होती है। जो कुछ भी तरल, मलने योग्य या छिड़कने योग्य है, वह इस नियम के अंतर्गत आता है। जो यात्री दवाइयां या शिशु आहार लेकर चलते थे, उन्हें कई बार इसे अलग से साबित करना या जांच करानी पड़ती थी।
नई 3डी स्कैनर तकनीक के कारण अब खतरनाक तरल पदार्थों की सही पहचान संभव हो गई है, बिना यात्रियों को अपनी चीजें निकालने की आवश्यकता। यह उपकरण हैंडबैग का त्रिविमीय चित्र बनाता है और संदिग्ध पदार्थों का पता लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करता है। इस प्रकार, सुरक्षा से समझौता किए बिना कड़े नियमों को छूट दी जा सकती है।
यूरोपीय संघ के कुछ हवाईअड्डों ने यह नए स्कैनर पहले ही लागू कर लिए हैं। इनमें Schiphol, लंदन सिटी एयरपोर्ट, मिलान लिनाटे, रोम फ्यूमिकीनो और स्पेन, फिनलैंड और आयरलैंड के कई हवाईअड्डे शामिल हैं। साथ ही जर्मनी और फ्रांस के हवाईअड्डों में भी इसे लागू करना शुरू हो गया है, हालांकि यह प्रक्रिया सभी जगह समान गति से नहीं चल रही।
यह उपकरण लागू करने का निर्णय यूरोपीय संघ के बजाय राष्ट्रीय अधिकारियों के पास है। हर सदस्य देश स्वयं तय करता है कि कब और क्या नए उपकरण खरीदे जाएं। लागू करने की गति भी विभिन्न है। कुछ देशों में निविदा प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है या हवाईअड्डों की बुनियादी संरचना में समस्याएं हैं।
सिर्फ तरल पदार्थ नियम ही नहीं, बल्कि पहले से कई यूरोपीय हवाईअड्डों पर सुरक्षा जांच में जूते उतारने की बाध्यता भी समाप्त हो चुकी है। बेहतर स्कैन उपकरणों के कारण लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स को भी कई हवाईअड्डों पर अब बैग से बाहर निकालने की जरूरत नहीं है। फिर भी ये सुविधाएं अभी सभी जगह उपलब्ध नहीं हैं।

