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पोलैंड की पोल्ट्री उद्योग को और अधिक पक्षी फ्लू के बाद यूरोपीय संघ के आयात प्रतिबंध का डर

Iede de VriesIede de Vries
यूरोपीय आयोग सोमवार को पोलैंड में पोल्ट्री फार्मों पर बढ़ती पक्षी फ्लू महामारी को रोकने के लिए आपातकालीन उपाय लेकर आयेगा। पोलिश मुर्गी पालनकर्ता एक अस्थायी पूर्ण पोलिश निर्यात प्रतिबंध से डर रहे हैं। अन्य यूरोपीय संघ देशों में भी लाखों मुर्गियों, बतखों और हंसों को जबरन मरने के लिए हटाया जा रहा है।
Afbeelding voor artikel: Poolse pluimveesector vreest EU-importverbod na nog meer vogelgriep

ब्रुसेल्स में यह नई कार्रवाई मध्य और दक्षिण पोलैंड के व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों में संदिग्ध संक्रमण में चिंताजनक वृद्धि के बाद घोषित की गई है। इन आपात उपायों की पूर्ण जानकारी अब तक साझा नहीं की गई है।

पोलिश पोल्ट्री उद्योग बड़ी चिंता में है। किसान और निर्यातक डरते हैं कि यूरोपीय संघ पोलैंड के सभी क्षेत्र से अस्थायी रूप से सभी निर्यातों पर प्रतिबंध लगा सकता है, यहां तक कि उन क्षेत्रों से भी जो (अभी?) पक्षी फ्लू से प्रभावित नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि ऐसा निर्णय इस उद्योग को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचाएगा और पोलैंड को इस क्षेत्र में अपनी अग्रणी स्थिति से बाहर कर सकता है।

पोलैंड के यूरोपीय संघ में जुड़ने के बाद से पोल्ट्री उद्योग ने जबरदस्त विकास किया है। वर्तमान में पोलैंड यूरोप में मुर्गी के मांस का एक प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश बन चुका है। इस क्षेत्र का आधुनिकीकरण और यूरोपीय बाजार के साथ एकीकरण ने उत्पादन और निर्यात में तीव्र वृद्धि दिलाई है। 

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अन्य यूरोपीय संघ देशों को भी पक्षी फ्लू का प्रभाव झेलना पड़ रहा है। जर्मनी में व्यावसायिक पोल्ट्री फार्मों के लिए जोखिम स्तर को फिलहाल "मध्यम" आंका गया है। वहीं हंगरी में लाखों जानवरों को निपटाया जा चुका है। 

इटली, पोलैंड, हंगरी, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क, ग्रीस, स्पेन, स्लोवाकिया, रोमानिया, चेक गणराज्य, नॉर्थ आयरलैंड और आयरलैंड में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। संक्रमण मुख्य रूप से पानी के पक्षियों (बतख, हंस, सारस) में पाया गया है, साथ ही शिकारी पक्षी, समुंदर चील और लंबे पैर वाले पक्षी भी प्रभावित हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वव्यापी पक्षी फ्लू का फैलाव मुख्य रूप से आव्रजन करने वाले जंगली पक्षियों के कारण है। ये पक्षी वायरस को लंबी दूरी तक ले जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में एशिया, यूरोप और उत्तर- तथा दक्षिण अमेरिका जैसे कई महाद्वीपों में इसका प्रकोप देखा गया है। 

वैज्ञानिकों ने नोट किया है कि पक्षी फ्लू वायरस अब अन्य प्रजातियों पर भी तेजी से फैल रहा है। सूअरों, गायों और बिल्लियों में भी संक्रमण पाए गए हैं। कुछ मामलों में वायरस समुद्री शावकों और लोमड़ियों में भी मिल चुका है। H5N1 प्रकार का वायरस इंग्लैंड के दक्षिण-पूर्वी तट के एक समुद्री शावक कॉलोनी में भी दर्ज किया गया है। वहां 40 मृत ग्रे समुद्री शावक पाए गए और 15 जानवरों के एक नमूने में वायरस मौजूद था।

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यह लेख Iede de Vries द्वारा लिखा और प्रकाशित किया गया है। अनुवाद स्वचालित रूप से मूल डच संस्करण से उत्पन्न किया गया था।

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