हाल के सर्वेक्षण बाबिश की ANO पार्टी को करीब तीस प्रतिशत की स्पष्ट बढ़त दिखा रहे हैं। इसके साथ ही वे प्रधानमंत्री पेत्र फियाला की केंद्र-वाम गठबंधन सरकार से दस प्रतिशत अंक आगे हैं। फिर भी, कोई भी पार्टी बहुमत की ओर नहीं बढ़ रही है, जिससे गठबंधन सरकार बनाने की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।
बाबिश अपने चुनाव प्रचार में कर कटौती और अधिक खर्च के वादे कर रहे हैं। साथ ही वे उन विषयों पर खुद को उभारते हैं जो यूरोस्केप्टिक और दक्षिणपंथी पार्टियों से जुड़े हुए हैं। वे चेक युद्ध सामग्री की यूक्रेन को आपूर्ति खत्म करना चाहते हैं और यूरोपीय संघ की हरित नीतियों का विरोध करते हैं। इसके साथ-साथ वे जोर देते हैं कि वे EU या NATO सदस्यता पर कोई जनमत संग्रह नहीं चाहते।
देश में असंतोष उनके पक्ष में काम कर रहा है। कई चेक नागरिक उच्च मुद्रास्फीति, महंगी ऊर्जा और पेन्शन प्रणाली के अप्रिय सुधारों के परिणामों से जूझ रहे हैं। ये सामाजिक और आर्थिक चिंताएं बाबिश के पॉपुलिस्ट संदेश की पकड़ मजबूत कर रही हैं और विपक्ष एवं वर्तमान सरकार के बीच खाई बढ़ा रही हैं।
एक जटिल कारक बाबिश का व्यवसायिक पृष्ठभूमि है। चेक गणराज्य के सबसे बड़े कृषि व खाद्य समूहों में से एक, एग्रोफर्ट के मालिक के रूप में, वे वर्षों से हितों के टकराव को लेकर आलोचना के केंद्र में रहे हैं। एग्रोफर्ट में दो सौ से अधिक कंपनियां शामिल हैं और यह पशुपालन, डेयरी, बेकरी से लेकर उर्वरक तक खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थिति रखता है। यह उनके विरोधियों द्वारा तीव्र आलोचना का कारण है।
चुनावों के ठीक पहले इस मामले ने नया मोड़ लिया। चेक सरकार ने एग्रोफर्ट को 200 मिलियन यूरो से अधिक, मुख्य रूप से यूरोपीय कृषि सब्सिडी वापस करने का आदेश दिया। न्यायाधीश के अनुसार, बाबिश ट्रस्ट संरचनाओं के बावजूद वास्तविक नियंत्रण बनाए हुए थे, जिससे सब्सिडी अवैध मानी गई। बाबिश इसका खंडन करते हैं और आरोप लगाते हैं कि सरकार इस मामले का राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग कर रही है।
इस वित्तीय मामला के अलावा, एक EU सब्सिडी के संबंध में पुनः खुली एक आपराधिक मामले का भी असर है। दो मिलियन यूरो की यह सब्सिडी स्टॉर्क्स नेस्ट परियोजना के लिए दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व में की गई बरी की कार्रवाई को रद्द कर दिया है और निचली अदालत को मामले का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्देश दिया है। इससे बाबिश की संभावित प्रधानमंत्री भूमिका पर फिर से कानूनी सवाल उठ रहे हैं।
पहले के घोटाले, जैसे ब्रेड उत्पादन सब्सिडी से जुड़ा "टोस्ट मामला" और पांडोरा पेपर्स में छुपी विला खरीद के खुलासे, उनके विवादास्पद चरित्र को मजबूत करते हैं। यूरोपीय आयोग ने भी पाया है कि बाबिश ने पहले हितों के टकराव के नियमों का उल्लंघन किया था और 2017 से एग्रोफर्ट को दी गई सब्सिडी अवैध थीं।
इस प्रकार चेक चुनाव केवल आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्राग और ब्रुसेल्स के बीच संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। नतीजा चेक गणराज्य की यूरोपीय संघ में स्थिति और आंद्रेई बाबिश के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक होगा।

