फ्रांसीसी किसान कहते हैं कि EU कृषि पर लगातार पर्यावरण संबंधी अधिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जबकि उनके दक्षिण अमेरिकी प्रतिस्पर्धियों को इन मानदंडों का पालन नहीं करना पड़ता। उन्हें डर है कि इससे असमान प्रतिस्पर्धा पैदा होगी।
इस समस्या से निपटने के लिए EU पहले ही प्रस्ताव तैयार कर रहा है कि गैर-EU देशों से आयात पर एक तरह का पर्यावरण सुधार लागू किया जाए, जिसे अतिरिक्त आयात-पर्यावरण कर के रूप में नामित न किया जाए। लेकिन इस 'आइना प्रभाव' और 'समान प्रतिस्पर्धा क्षेत्र' पर EU देशों और यूरोपीय संसद में अभी तक अंतिम सहमति नहीं बनी है।
कई यूरोपीय देशों में मेरकुसुर के अपने कृषि क्षेत्र और पर्यावरण पर प्रभाव को लेकर चिंता है। अन्य देश कहते हैं कि ये शिकायतें बहुत देर से सामने आई हैं, और दक्षिण अमेरिकी खाद्य निर्यात में वृद्धि EU की समर्थित उदार मुक्त व्यापार नीति का अपरिहार्य परिणाम है।
यह आह्वान फ्रांसीसी कृषि संगठन (FNSEA) और मवेशी एवं मांस उद्योग संगठन (Interbev), अनाज (Intercereales), खाद्य मुर्गी पालन (ANVOL), चीनी (AIBS) तथा तेल और प्रोटीन युक्त पौधों (Terres Univia) के क्षेत्रीय संगठनों द्वारा तैयार किया गया है। मैक्रॉन की प्रतिक्रिया अभी निश्चित नहीं है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे फ्रांसीसी आर्थिक हितों की पूरी कटिबद्धता से रक्षा करेंगे।
यूरोपीय आयोग ने हाल ही में बताया है कि मेरकुसुर समझौते को इस वर्ष ratify नहीं किया जाएगा। अगले वर्ष फ्रांस छह महीने के लिए EU अध्यक्ष होगा। योजना के अनुसार तब समझौते की ratification पूरी हो सकती है।
पर्दे के पीछे उस पहले से सहमत समझौते के पाठ के साथ एक 'परिशिष्ट' पर काम चल रहा है। उसमें यह तय होना चाहिए कि दक्षिण अमेरिकी देश EU के समान ही पर्यावरण मानकों का पालन करेंगे, लेकिन यह मुख्य रूप से अमेज़न वर्षावन में बड़े पैमाने पर हो रहे वनों कटाई से संबंधित होगा। यह EU के किसानों की प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं को लगभग पूरी तरह से दूर नहीं करता।

