इस बहुवर्षीय वित्तीय ढांचे (एमएफके) में यूरोपीय आयुक्तों द्वारा मौजूदा EU बजटों और निधियों में बड़ी बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इस पर अब 27 EU देशों के संबंधित मंत्रियों और यूरोपीय संसद को आने वाले महीनों में सहमति बनानी होगी।
यूरोपीय संघ अपनी प्राथमिकताएँ अधिक रक्षा खर्चों और मजबूत औद्योगिक नीति की ओर स्थानांतरित कर रहा है। इस कारण पर्यावरण और जलवायु के बजट दबाव में आ रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी के निर्धारित लक्ष्य अभी भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
EU ने वर्षों तक उत्सर्जन को कम करने पर काफी जोर दिया है। रक्षा और औद्योगिक स्वतंत्रता पर नई जोर देने के साथ अब जलवायु नीति पीछे हट रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इस कारण आने वाले पंद्रह वर्षों में उत्सर्जन को आधा करने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकेगा।
साथ ही, दलदलों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। नदी डेल्टाओं और तटीय क्षेत्रों को पुनः आर्द्र बनाना बहुत अधिक कार्बन संग्रहीत कर सकता है और पीलीकरण को रोक सकता है। आलोचकों का मानना है कि इस दृष्टिकोण का वैज्ञानिक मूल्यांकन अभी अपर्याप्त है। इसलिए जलवायु लक्ष्यों में इसका वास्तविक योगदान अनिश्चित है।
फिनलैंड, पोलैंड और बाल्टिक देशों में वर्तमान में रूस की सीमा के पास बड़े वन और प्राकृतिक क्षेत्रों को पुनः आर्द्र बनाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। ये क्षेत्र संभव सैन्य खतरे की स्थिति में टैंकों के खिलाफ प्राकृतिक बाधा के रूप में काम करेंगे।
डेनमार्क को हाल ही में यूरोपीय आयोग से 626 मिलियन यूरो से अधिक की नई वनस्थापना परियोजनाओं के लिए अनुमति मिली है। इसके तहत हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि, खासकर डेयरी क्षेत्र की, को प्राकृतिक क्षेत्र में परिवर्तित किया जाएगा।
डेनिश सरकार, उद्योग और स्थानीय प्रशासनों ने पिछले वर्षों में गंभीर त्रिपक्षीय संक्रमण योजना बनाई है, जो डेनिश ग्रामीण इलाके और गहन कृषि तथा पशुपालन क्षेत्र के लिए है।
इस योजना में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि सभी हितधारक क्या नहीं चाहते, बल्कि वे मिलकर क्या चाहते हैं। यह यूरोप के हालिया वर्षों के सबसे बड़े प्राकृतिक परियोजनाओं में से एक है।
डेनिश योजनाओं को मिली मंजूरी यह दर्शाती है कि ब्रुसेल्स अब वनस्थापना और पर्यावरण पुनर्स्थापन के लिए अनुदान को बाजार में बाधा नहीं मानता। पहले ऐसे अनुदान अक्सर किसानों और अन्य क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा में विकृति माने जाते थे। अब प्राकृतिक पुनर्स्थापन को यूरोपीय जलवायु और पर्यावरण रणनीति का अनिवार्य हिस्सा माना जाता है, हालांकि बजट सीमित होता जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह स्वीकार्यता बढ़ रही है कि दलदल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके पुनर्स्थापन से न केवल CO2 उत्सर्जन कम होता है, बल्कि जैव विविधता की रक्षा में भी मदद मिलती है। रिपोर्टों में यह बताया गया है कि यूरोपीय देश प्राकृतिक पुनर्स्थापन में अभी काफी पीछे हैं, जैसे कि खोए हुए दलदल क्षेत्रों को पुनः लाने में।
यूरोपीय आयोग बार-बार यह भी रेखांकित करता है कि EU देश अपने कृषि और खाद्य उद्योग को पर्यावरण और जलवायु अनुदानों के माध्यम से समर्थन दे सकते हैं, बशर्ते ये क्षेत्र 'उद्योग-विदेशी' अनुदान मानदंडों को स्वीकार करने को तैयार हों।

