आयोग इसराइल के साथ EU संघ समझौते के व्यापार भाग को निलंबित करना चाहता है। इसके अलावा, सरकार के रुख के रूढ़िवादी-कट्टरपंथी खेमे से संबंधित दो इसराइली मंत्रियों के लिए प्रवेश प्रतिबंध की तैयारी की जा रही है। ये कदम वॉन дер लेयन के अनुसार स्पष्ट करेंगे कि EU अब जारी सैन्य हिंसा को नजरअंदाज नहीं कर रहा है।
अपने स्ट्रासबर्ग भाषण के दौरान आयोग अध्यक्ष ने गाजा में इसराइली कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि असंतुलित सैन्य हिंसा के बड़े मानवीय प्रभाव हैं और यह राजनीतिक तथा आर्थिक परिणामों के बिना जारी नहीं रह सकता। साथ ही, उन्होंने जोर देकर कहा कि हमास को तुरंत सभी बंधकों को मुक्त करना चाहिए।
वॉन дер लेयन ने कतर में हमास नेताओं पर हालिया इसराइली बमबारी पर भी चर्चा की। उन्होंने इन बमबारीयों को चिंताजनक बताया और कहा कि वे क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ाते हैं। हालांकि उन्होंने इसराइली सैन्य कार्रवाई की व्यापक आलोचना की, लेकिन गाजा की स्थिति का वर्णन करने के लिए नरसंहार शब्द का प्रयोग नहीं किया।
यूरोपीय संसद इस सप्ताह गाजा पट्टी में हिंसा के बारे में एक प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है। इसमें मुख्य विवाद यह है कि क्या प्रस्ताव में 'नरसंहार' शब्द शामिल होना चाहिए या नहीं। विभिन्न गुट इस पर गहराई से विभाजित हैं, जिससे एक संयुक्त रुख बनाना कठिन हो रहा है।
संसद में यह बहस यूरोपीय राजनीति में बढ़ते तनाव को दर्शाती है। कुछ गुट कड़े निंदा के पक्ष में हैं और नरसंहार शब्द के स्पष्ट उपयोग का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य कानूनी और कूटनीतिक जटिलताओं के कारण ऐसी श्रेणीकरण के खिलाफ चेतावनी देते हैं।
वॉन дер लेयन ने EU की विदेश नीति निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी एक व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सर्वसम्मति की आवश्यकता को समाप्त कर इसे बहस पक्षीय बहुमत से बदलने का सुझाव दिया। इससे किसी एक सदस्य देश को निर्णय रोकने का अधिकार नहीं रहेगा।
यह प्रस्ताव उन देशों को लक्षित करता है जो अक्सर EU के निर्णयों को रोकते हैं, खासकर हंगरी। बहुमत निर्णय प्रक्रिया में परिवर्तन से आयोग यूरोपीय विदेश नीति के गतिरोध को रोकना चाहता है। सदस्यों की स्वीकृति आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी।
आयोग की यह नीति इसराइल के प्रति यूरोपीय नीति में एक मोड़ संकेत करती है। जहाँ पहले प्रतिक्रियाएं मुख्य रूप से कूटनीतिक आग्रह तक सीमित थीं, अब पहली बार प्रतिबंधों और व्यापार लाभों के निलंबन की स्पष्ट चर्चा हो रही है। इससे परिषद और संसद में आगामी विचार-विमर्श राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो जाएंगे।
अपडेट: इस लेख के पूर्व संस्करण में गलती से यमन का उल्लेख कतर की जगह किया गया था।

