आयोजित समारोह एक शांतिपूर्ण सम्मान के साथ मनाया गया, जिसमें सामूहिक विफलता को स्वीकार किया गया और नफरत तथा इनकार के प्रति सतर्क रहने की अपील की गई।
सामूहिक बैठक की शुरुआत मृतकों के लिए एक मिनट का मौन रखकर हुई। संसद सदस्यों ने 1995 की त्रासदी को रोकने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अक्षमता पर विचार व्यक्त किया। हजारों बोस्नियाई लड़कों और पुरुषों की हत्या, जो संयुक्त राष्ट्र के अधिकार वाले एन्क्लेव में हुई, यूरोपीय इतिहास में गहरे घाव के रूप में बनी हुई है।
स्ट्रासबर्ग में आयोजित स्मरण समारोह में एक विस्तृत बोस्नियाई प्रतिनिधिमंडल शामिल था, जिसमें नरसंहार के दो जीवित बचे लोग भी थे। कई वक्ताओं ने जोर दिया कि सरेब्रेनिका एक अलगावीय घटना नहीं थी। नरसंहार वर्षों से चल रहे नफरत फैलाने, मानवीय हनन और राजनीतिक प्रचार का परिणाम था।
यूरोपीय संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला ने सक्रिय स्मरण की अपील की और याद दिलाया कि यूरोपीय संसद ने 2009 में 11 जुलाई को आधिकारिक स्मरण दिवस घोषित किया था। उन्होंने कहा कि स्मरण केवल अतीत के प्रति एक कर्तव्य नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मिशन भी है: गलत सूचनाओं से लड़ने और यादों को ज़िंदा रखने का।
समारोह में केवल अतीत की बात ही नहीं हुई, बल्कि वर्तमान संघर्षों का भी उल्लेख किया गया। नागरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों के संदर्भ में वर्तमान यूरोपीय नीतियों की आलोचना हुई। सरेब्रेनिका का नरसंहार एक उदाहरण के रूप में पेश किया गया कि चेतावनी संकेतों की अनदेखी से क्या-क्या हो सकता है।
यह स्मरण समारोह आज के राजनीतिक रुझानों के लिए एक चेतावनी भी था, जहाँ विभिन्न जनसमूहों को पुनः कलंकित किया जा रहा है। इसमें फिलहाल गाजा पट्टी में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इज़राइली सैन्य कार्रवाइयों से तुलना भी की गई।
विभिन्न भाषणों में न्याय और सामूहिक स्मृति के महत्व पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सच्चाई को स्वीकार करना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर ऐसे समय में जब नरसंहार की अस्वीकृति और पुनः लेखन बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार तथ्यों की रक्षा एक लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।
संसद के बाहर विश्वभर में 11 जुलाई की यादों के लिए तैयारी हो रही है। बोस्निया-हर्जेगोविना में केंद्रीय समारोह में 150,000 तक लोग आने की उम्मीद है। मृतकों के की पहचान किए गए अवशेषों को पुनः दफनाया जा रहा है, जो दिखाता है कि शोक प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।
परिवारों और समुदायों में यह आघात बना हुआ है, केवल पूर्व युगोस्लाविया गणराज्यों में ही नहीं बल्कि यूरोप के अन्य हिस्सों में भी।
घटना के तीस साल बाद मान्यता और सच्चाई की आवाज़ जारी है। स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय स्मरण यह पुष्टि करता है कि इस त्रासदी से केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि नैतिक दायित्व भी जुड़े हैं।

